31 सर्वश्रेष्ठ नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ | Shikshaprad Kahaniyan in Hindi 2022

इस लेख में हमारे पास 31 सर्वश्रेष्ठ नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ का समग्र है। यह Shikshaprad Kahaniyan in Hindi के साथ हमने आपके लिए विशेष रूप से चुना है।

हर कहानियां मैं आपको कुछ ना कुछ शिक्षा मिलेगी जो लोग और दुनिया को समझने में मदद करेगी। इनमें से कुछ लघु नैतिक कहानियाँ बहुत छोटी और बुनियादी है। इसलिए पढ़ते समय आपकी ध्यान इन कहानियों में बनी रहेगी।

यहाँ कुछ Shikshaprad Kahani in Hindi with moral के साथ है जो बहुत ही रोचक और शिक्षाप्रद कहानियाँ है। हम आशा करते हैं, कि हमारी यह नैतिक शिक्षा पर कहानी इन हिंदी पढ़कर आपको बहुत आनंद आएगा। हमारे पास ऐसे ही कुछ और श्रेष्ठ नैतिक कहानियाँ है, चाहे तो आप इसे भी पड़ सकते है।

 

31 सर्वश्रेष्ठ नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ | Shikshaprad Kahaniyan in Hindi

Table of Contents

 

 

1. एक छोटा लड़का – नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक छोटा लड़का - नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक बार बहुत ठंड के दिन, एक छोटा लड़का एक जूते की दुकान के बाहर खड़ा था, नंगे पैर। वह ठंड से कांप रहा था और खिड़की से कुछ जूते को देख रहा था।

एक अमीर महिला उस दुकान से बाहर आई। उसने उस छोटे लड़के को देखा। वह उसके पास जाकर कहां, “बच्चा, तुम उस खिड़की कि मैं इतनी इमानदारी से क्यों देख रहे हो?”

छोटे लड़के ने जवाब दिया, “मेरे पास कोई जूता नहीं है। मैं भगवान से, मुझे एक जूते देने के लिए कह रहा था।” यह सुनकर महिला ने, उस लड़के को दुकान के अंदर ले गई।

और दुकान के मालिक से पूछा, कि क्या उसे पानी मिल सकता है। मालिक कुछ ही मिनट में पानी ले आया। और फिर उस लड़के को दुकान के पीछे ले गया।

और छोटे लड़कों के हाथ पैर साफ किया, और सुखाया। फिर, उसे दुकान में वापस ले गया और मालिक को कुछ जूता लाने के लिए कहा।

फिर महिला ने जूते खरीदे, और उसे छोटे लड़के को पहनने के लिए दे दिया। और कहां, “क्या तुम अब अधिक सहज महसूस कर रहे हैं?”

जब वह वहां से जा रही थी, तो छोटे लड़के ने उसे हाथों से पकड़ा। उसकी दोनों आंखों में आंसू थी उसने कहा, “क्या आप भगवान के पत्नी हो?”

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2. बलिदान – Shikshaprad Kahaniyan in Hindi

बलिदान - Shikshaprad Kahaniyan in Hindi

एक बार की बात है, एक व्यक्ति भगवान के सामने बलिदान देने के लिए तैयारी कर रहा था। बकरियां और भेड़ों को एक साथ कत्ल करने के लिए खरीदा गया था।

जब बलिदान का दिन आया, तो भगवान ने मनुष्य से मुलाकात की और उन्होंने काई चीजों पर चर्चा की। अंत में भगवान ने, मनुष्य की पवित्रता के बारे में बात की।

भगवान ने कहा, “जीवो को कत्ल करना पाप है। किसी भी निर्दोष जीवो को कत्ल करके, आपको पापों और भ्रमों से छुटकारा नहीं मिल सकता है।”

भगवान का वचन, मनुष्य की आत्मा के गहरे तक गया। वह समझ गया कि, “शुद्ध दिल और ईमानदारी तरीकों से भगवान का पूजा करना, बलिदान से कई अधिक मूल्य है।”

व्यक्ति ने फैसला किया, कि उन जानवरों को आजादी दी जानी चाहिए। और कत्ल करने के बजाए, उन्हें अपनी मर्जी से अपनी जिंदगी जीने के लिए आजाद छोड़ देना चाहिए।

नैतिक शिक्षा : हमें, किसी भी निर्दोष प्राणी को नहीं मारना चाहिए। वह सभी भगवान का संतान है।

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3. भगबान और बच्चा – शिक्षा पर कहानी इन हिंदी

भगबान और बच्चा - Hindi Shikshaprad Kahaniyan

एक बार की बात है, एक बच्चा पैदा होने के लिए तैयार था। एक दिन बच्चे ने भगवान से पूछा, “मुझे बताइए, कि आप मुझे कल पृथ्वी पर भेजने जा रहे हैं।”

लेकिन, मैं वहां कैसे रह पाऊंगा, जबकि मैं इतना छोटा और असहाय है।” भगवान ने उत्तर दिया, “मैंने तुम्हारे लिए एक को चुना है। वह तुम्हारा इंतजार कर रही है और तुम्हारी देखभाल करेगी।

फिर, बच्चे ने कहा, “मैं कैसे समझ पाऊंगा, जब लोग मुझसे बात करेंगे। मैं तो उस भाषा को नहीं जानता।”

भगवान ने कहा, “यह आसान है! आपकी परी आपको सबसे सुंदर और मीठे शब्द बताएंगे। बहुत धीरज और देखभाल के साथ, आपका परी आपको बोलना दिखाएगा।”

फिर बच्चे ने पूछा, “जब मैं आपसे बात करना चाहूंगा, तब मैं क्या करूंगा।” भगवान ने बच्चे को मुस्कुराते हुए कहा, “आपकी परी आपको प्रार्थना करना सिखाएगी।”

बच्चे ने कहा, “मैंने सुना है, कि धरती पर बुरे आदमी रहता है। उनसे मेरी रक्षा कौन करेगा?” भगवान ने उत्तर दिया, “आपका परी आपकी रक्षा करेगा। आपको खरते से बचाएगा।”

बच्चे दुखी होकर कहां, “लेकिन, मैं हमेशा दुख ही रहूंगा। क्योंकि, मैं अब आपको नहीं देख पाऊंगा।” भगवान ने उत्तर दिया, “आपका परी, हमेशा मेरे बारे में आपसे बात करेगा।

और आपको मेरे पास वापस आने के लिए, रास्ता दिखाएगा। भले ही मैं हमेशा आपके साथ रहूंगा।” उस समय स्वर्ग में बहुत शांति थी। लेकिन धरती से आवाज सुनी जा सकती थी।

जल्दी मैं बच्चे ने धीरे से पूछा, “हे भगवान, मैं अब निकलने वाला हूं। कृपया, मुझे अपने परी का नाम बताएं।” भगवान ने उत्तर दिया, “आपकी परी का नाम नहीं है, आप बस उसे मां कहेंगे।”

नैतिक शिक्षा : मां से ही अपना जीवन का शिक्षा शुरू होती है।

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4. दादाजी की मेज – हिंदी नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

दादाजी की मेज - हिंदी नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक बार, एक कमजोर बूढ़ा आदमी अपने बेटे के पास शहर में रहने चला गया। वहां उसके बेटे, बहू और एक चार साल के पोते रहते थे। बूढ़ा आदमी वहां जाकर थोड़ी देर आराम किया।

फिर शाम को खाना खाने के लिए, पूरा परिवार मेज़ पर बैठा। लेकिन, बुजुर्ग दादाजी के कांपती हुई हाथों की वजह से खाना मुश्किल हो गया। जब वह, दूध का ग्लास पकड़ा।

तो दूध हाथों से फिसल कर मेज पर गिर गया। बेटे और बहु बहुत गुस्सा हो गया। बेटे ने कहा, “पिता को, हमारे साथ बड़ी मेज पर बैठकर खाने की आदत नहीं है।”

इसीलिए, बेटे और बहू ने कोने में एक छोटी सी मेज लगाई। वहां, दादाजी को खाने के लिए दिया। जबकि परिवार के बाकी लोगों ने, रात के खाने का आनंद लिया।

चुंकि, दादाजी ने एक गिलास तोड़े थे। इसलिए, उनका खाना लकड़ी के कटोरे में दिया गया था। जब परिवार ने दादाजी पर नजर डाली, तब खाना खाते वक्त उनकी आंखों में आंसू देखे।

चार साल के बच्चे ने, यह सब खामोशी से देखा। फिर अगली सुबह पिता ने देखा, उसका बेटा लकड़ी के साथ खेल रहा है। उन्होंने बच्चे से मीठी से पूछा, “तुम क्या बना रहे हो?”

लड़के ने जवाब दिया, “जब मैं, बड़ा हो जाऊंगा। मैं, आपको और मां को खिलाने के लिए एक छोटी कटोरी बना रहा हूं।” चार साल का मासूम बच्चा, मुस्कुराया और काम पर वापस लग गया।

इस शब्द ने माता-पिता को इतना कठोर कर दिया, कि वे अवाक रह गए। फिर उनके गालों पर आंसू बहने लगे। हालांकि, तब कोई शब्द नहीं बोला था। लेकिन, दोनों जानते थे कि क्या किया जाना चाहिए।

उसी दिन, पिता ने दादाजी का हाथ थाम लिया। और उन्हें परिवार की मेज पर वापस ले आया। अपने बाकी जीवन के लिए, उन्होंने अपने परिवार के साथ हर भोजन खाया।

नैतिक शिक्षा : बच्चों की आंखें हमेशा देखती रहती हैं। उनके कान हमेशा सुनते हैं, और बच्चों के मन में संदेश जाता है।

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5. तितली और कोकून – नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

तितली और कोकून - नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक बार, एक आदमी को तितली का एक कोकून मिला। वह वहां बैठ गया और कई घंटों तक कोकून को देखता रहा। क्योंकि, वह उस छोटी सी छेद के माध्यम से,

अपने शरीर को, कोकून से बाहर निकालने के लिए संघर्ष कर रहा था। फिर ऐसा दिखाई दिया, जैसे की तितली थक गया था। और यह कोकून से बाहर नहीं निकल सकता था।

तब उस आदमी ने, तितली की मदद करने की फैसला किया। इसलिए, उसने एक कैंची ली और कोकून के बाकी हिस्सों को काट दिया था। तितली तब आसानी से बाहर बाहर आ गई।

लेकिन, इसका शरीर सूजा हुआ था और इसके पंख बहुत छोटे छोटे थे। वह आदमी तितली को देखता रहा। क्योंकि, वह उम्मीद करता था,

कि किसी भी समय, पंख का विस्तार होगा और शरीर को फैलाने में सक्षम हो जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। वास्तव में, तितली अपना सारा जीवन एक सूजे हुए शरीर और टूटे पंखों के साथ बिताया।

यह तितली कभी उड़ान भरने में सक्षम नहीं था। आदमी को दयालुता और जल्दबाजी में समझ में नहीं आया, कि इस तितली को कोकून से बाहर निकलने के लिए संघर्ष की जरूरत थी।

तितली के शरीर से, उसके पंखों को दबाने का प्रकृति का तरीका था। ताकि, वह तैयार रहें उड़ान भरने के लिए। और कोकून से आजादी पाने के लिए।

नैतिक शिक्षा : अगर प्रकृति हमें बिना किसी बाधा के अपना जीवन जीने देती है, तो यह हमें अपंग कर देगा।

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लघु शिक्षाप्रद कहानियाँ हिंदी में

6. पूरा भुगतान – हिंदी नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

पूरा भुगतान - हिंदी नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक बार, एक छोटा लड़का शाम को रसोई मे अपनी मां के पास आया। तब मां रात का खाना बना रही थी। उसने अपने मां को एक कागज दिया। मां ने उसे पढ़ना शुरू किया।

“घास काटने के लिए: ₹50, इस सप्ताह मेरे कमरे की सफाई के लिए: ₹100, आपके लिए दुकान पर जाने के लिए: ₹50, कचरा बाहर निकलने के लिए: ₹50

एक अच्छा रिपोर्ट कार्ड प्राप्त करने के लिए: ₹100, जब आप खरीदारी करने के लिए गए थे। तब मेरा भाई मेरे पास था, उसका देखभाल करने के लिए: ₹50, कुल मिलाकर ₹400।”

खैर, उसकी मां ने वहां खड़े होकर बेटे की तरफ देखा। फिर उसने कलम उठाई, और जो उसने लिखा था उस कागज को पलट दिया। और फिर उसने लिखा,

“जब तुम मेरे अंदर बढ़ रहे थे। तो मैंने आपको 10 महीने तक मेरे पेट के अंदर रखा। उन रातों के लिए, जब मैं आपके साथ अस्पताल में बैठी थी और पर्थना कर रही थी, कोई शुल्क नहीं?

उन आंसुओं को लिए, जो आप सालों से जमा रहे थे। पूरी रात डर से भरी हुई, और जो विचार मेरे पास थे, उन शॉट्स के लिए। कोई शुल्क नहीं है?

मेरे प्यार की कीमत, खिलौने, भजन, कपड़े और यहां तक की तुम्हारा नाक पोंछने के लिए. कोई शुल्क नहीं है?”

जब लड़का, अपनी मां के लिखा को पढ़ना समाप्त किया। तो उसकी आँखों मे आँसू थे, उसने सीधे अपनी माँ की ओर देखा। और कहा, “मां मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।

और फिर उन्होंने कलम ली और बड़े अक्षरों में उन्होंने लिखा, पूर्ण भुगतान।

नैतिक शिक्षा : हमें अपनी मां से हमेशा प्यार करनी चाहिए, क्योंकि मां भगवान होता है।

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7. पेंसिल की तरह – Shikshaprad Naitik Kahani

पेंसिल की तरह - Shikshaprad Naitik Kahani

एक बार, एक पेंसिल निर्माता ने पेंसिल को बॉक्स में डालने से पहले कहा, “तीन चीज है, जो आपको जानना जरूरी है। एक अच्छी पेंसिल बनने के लिए, हमेशा उन्हें याद रखें और कभी ना भूले।”

एक: आप कई महान कार्य कर पाएंगे। लेकिन केवल तभी, जब आप अपने आप को किसी के हाथ में रखने की अनुमति देंगे।

दो: आप समय-समय पर एक दर्द अनुभव करेंगे। लेकिन आपको, एक बेहतर पेंसिल बनने के लिए इसकी आवश्यकता होगी। आप जो भी गलतियां करेंगे, उन्हें सुधारने में सक्षम होगी।

तीन: जो भी पृष्ठ पर तुम्हारा उपयोग किया जाता है, तुम्हें अपनी छाप छोड़नी होगी। क्या हालत है, कोई फर्क नहीं पड़ता। आपको, हमेशा लिखना जारी रखना होगा।

पेंसिल ने समझा, और याद करने का वादा किया। अब पेंसिल की तरह, आपने भी हमेशा उसे याद रखें और कभी ना भूले। तो आप सबसे बेहतर व्यक्ति बन जाएंगे।

एक: आप कई महान कार्य करने में सक्षम होगी। लेकिन केवल तभी, जब आप अपने आप को भगवान के हाथ में रखने की अनुमति देंगे।

दो: आप समय-समय पर, जीवन में विभिन्न समस्याओं से गुजरते हुए एक दर्द का अनुभव करेगी। लेकिन आपको एक मजबूत व्यक्ति बनने के लिए, इसकी आवश्यकता होगी। आप जो भी गलतियां करेंगे, उसे सुधारने में सक्षम होगी।

तीन: जिस भी रास्ते से तुम चलते हो, तुम्हें अपनी छाप छोड़नी होगी। कोई फर्क नहीं पड़ता, की स्थिति क्या है। आपको हमेशा, अपने कर्तव्यों को जारी रखना चाहिए।

पेंसिल का यह चित्रण, आपको प्रोत्साहित करने के लिए। आप एक विशेष व्यक्ति है। केवल आप उस उद्देश्य को पूरा कर सकते हैं। जिसे आप पूरा करने के लिए पैदा हुए हैं।

नैतिक शिक्षा : कभी भी खुद को हतोत्साहित न होने दें। और यह मत सोचो कि तुम्हारा जीवन महत्वपूर्ण है।

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8. अनमोल पत्थर – छोटी नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

अनमोल पत्थर - छोटी नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक बार की बात है, एक बूढ़ी महिला हिमालय के पहाड़ों से गुजर रही थी। रास्ते में उसे एक कीमती पत्थर मिला। उसने पत्थर को उठाकर अपने बैग में रख लिया और अपनी यात्रा जारी राखी।

अगले दिन रास्ते में उसे एक आदमी मिला, जो बहुत भूखा था। बूढ़ी महिला को देखकर आदमी ने भजन मांगा। उसने उस आदमी को खाना देने के लिए अपना बैग खोला।

जब उसने अपना बैग खोला। तो आदमी ने, बैग में उस कीमती पत्थर को देखा। आदमी, उस कीमती पत्थर को पाना चाहता था। इसीलिए उसने उसे वह पत्थर देने के लिए कहा।

बूढ़ी महिला ने उस पत्थर को, बिना किसी हिचकिचाहट दे दिया और अपनी यात्रा जारी रखी। भूखा आदमी उस कीमती पत्थर को पाकर बहुत खुश हुआ।

वह जानता था, कि उस पत्थर से उसे कभी पैसे की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। और पत्थर ने उसे जीवन भर के लिए सुरक्षा देगी।

लेकिन कुछ दिनों के बाद, आदमी उस कीमती पत्थर के साथ पहाड़ पर लौट आया। उसने उस पत्थर को वापस करने के लिए बूढ़ी महिला की तलाश की।

कुछ खोज के बाद, उसने बूढ़ी महिला को पाया। फिर वह उसके पास गया और कहां, “मुझे यह कीमती पत्थर देने के लिए धन्यवाद।”

लेकिन, आज मैं तुम्हें कीमती पत्थर को वापस करने के लिए आया था। इस उम्मीद के साथ, कि तुम मुझे कुछ और भी कीमती चीज दे सकते हो।

आपके भीतर क्या है, वह मुझे दीजिए। क्योंकि, आप बिना किसी हिचकिचाहट उस कीमती पत्थर को मुझे दे दिया। आप बहुत ही अच्छी महिला है।

नैतिक शिक्षा : जो दूसरों के लिए सोचते हैं, भगवान उसके लिए सोचते है।

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तो दोस्तों हम आशा करते हैं, कि आपको  21 सर्वश्रेष्ठ नैतिक शिक्षाप्रद कहानियाँ पढ़कर जरूर अच्छी लगी होगी और कृपया करके इन नैतिक कहानियाँ को आप अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ शेयर जरूर करें।

ताकि हर कोई इन मजेदार शिक्षावर्धक कहानियों को पढ़ सके। हमारे आज के विषय Shikshaprad Kahani in Hindi तो पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

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